स्कोलियोमीटर का इस्तेमाल एडम्स फॉरवर्ड बेंड टेस्ट के दौरान किया जाता है। व्यक्ति आगे झुकता है, उपकरण पीठ पर सीधा रखा जाता है, और धड़ के घुमाव के कोण (ATR) की सबसे बड़ी रीडिंग दर्ज की जाती है। उपकरण से ज़्यादा तरीका मायने रखता है।
चिकित्सकीय समीक्षा: डॉ. केविन लाउ, D.C. · अपडेट 24 जुलाई 2026
स्कोलियोमीटर की रीडिंग में ज्यादातर अंतर मुद्रा और उपकरण की स्थिति से आता है, उपकरण से नहीं। असमान पीठ, टेढ़ा पकड़ा गया फोन, या हर बार अलग व्यक्ति का मापना — ये अपने आप ही संख्या को कई डिग्री बदल देते हैं। यह मार्गदर्शिका पहले जांच को चरणबद्ध तरीके से समझाती है, फिर उन गलतियों को जो रीडिंग को सबसे ज्यादा बिगाड़ती हैं।
शुरू करने से पहले: स्कोलियोमीटर
जांच में सहायक साधन है। यह धड़ का घुमाव मापता है, रीढ़ की हड्डी का मुड़ाव नहीं, और स्कोलियोसिस की पहचान नहीं कर सकता। इसका काम यह तय करने में मदद करना है कि डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है या नहीं। और जानें —
स्कोलियोमीटर क्या मापता है।
क्या-क्या चाहिए
- एक साधारण स्कोलियोमीटर, या स्मार्टफोन पर Scoliometer App।
- समतल और सख्त फर्श — बिस्तर, गद्दा या ढलान वाली सतह नहीं।
- अच्छी रोशनी और पीठ साफ़ दिखाई देनी चाहिए। कपड़े हटाएं या ऊपर करें ताकि रीढ़ की हड्डी दिखे।
- रीडिंग लेने के लिए दूसरा व्यक्ति। इस जांच में खुद पर माप लेना भरोसेमंद नहीं होता।
- नतीजा लिखने की जगह — तारीख, पीठ का हिस्सा और रीडिंग।
चरणबद्ध तरीका: आगे झुकने वाली जांच कैसे करें
- व्यक्ति को सीधा खड़ा कराएं, पैर आपस में मिले हुए। घुटने सीधे, वजन दोनों पैरों पर बराबर, जूते उतरे हुए। वजन असमान होने पर कूल्हे टेढ़े हो जाते हैं और आगे का सारा माप बिगड़ जाता है।
- कूल्हों से आगे झुकने को कहें। हाथ ढीले लटके रहें, हथेलियां आपस में मिली हुई, सिर और गर्दन ढीले। झुकाव तब तक जब तक पीठ लगभग समतल न हो जाए — पूरी तरह पैर की उंगलियां छूने तक नहीं, क्योंकि इससे रीढ़ गोल हो जाती है और वही असंतुलन दब जाता है जिसे आप देखना चाहते हैं।
- पीछे खड़े हों, पीठ के स्तर पर। बैठ या झुककर ऐसे देखें कि नज़र पीठ के साथ-साथ जाए, ऊपर से नीचे की ओर नहीं।
- स्कोलियोमीटर को पीठ पर सीधा रखें, रीढ़ की हड्डी के आर-पार, और उसका बीच का हिस्सा रीढ़ की उभरी हड्डियों पर। ऐप इस्तेमाल कर रहे हों तो फोन को भी इसी तरह पीठ पर सीधा रखें, दबाए बिना।
- धीरे-धीरे पीठ पर नीचे की ओर ले जाएं — ऊपरी पीठ (वक्ष), बीच की पीठ, फिर कमर। हर हिस्से पर रुकें और रीडिंग को स्थिर होने दें।
- सबसे बड़ी रीडिंग और उसकी जगह लिखें। जांच के मानक इसी सबसे बड़े मान की बात करते हैं। हिस्सा भी लिखें: “7° ऊपरी पीठ, दाईं ओर” बाद में केवल “7°” से कहीं ज़्यादा काम आता है।
ऐसी रीडिंग कैसे लें जिसकी तुलना समय के साथ हो सके
एक अकेली संख्या उतना नहीं बताती जितना एक ही तरीके से ली गई रीडिंग की श्रृंखला। तुलना लायक रीडिंग के लिए:
- मापने वाला हर बार एक ही रहे। अलग-अलग लोगों के मापने से आने वाला अंतर सबसे बड़ा कारण है।
- हालात एक जैसे रखें — वही फर्श, उतना ही झुकाव, वही फोन, और हो सके तो बिना कवर के।
- दिन के एक ही समय पर मापें। मुद्रा और ऊंचाई दिनभर में थोड़ी बदलती रहती है।
- माप दो-तीन बार दोहराएं और एक बार के नतीजे की जगह लगातार आने वाला सबसे बड़ा मान लें।
- हर रीडिंग तारीख के साथ लिखें। बदलाव उतना ही मायने रखता है जितना कोई एक नतीजा।
आम गलतियां और उनका रीडिंग पर असर
| गलती | रीडिंग पर असर |
|---|
| बहुत ज़्यादा झुकना (पैर की उंगलियां छूने तक) | पसलियों का उभार दब जाता है — रीडिंग असल से कम आती है |
| पर्याप्त न झुकना | घुमाव अभी उभरा ही नहीं — रीडिंग कम आती है |
| पैर अलग-अलग, या वजन एक पैर पर | कूल्हे टेढ़े हो जाते हैं — कई डिग्री का झूठा असंतुलन जुड़ सकता है |
| उपकरण रीढ़ के आर-पार सीधा नहीं | गलत दिशा का माप — गड़बड़ी का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता |
| फोन को पीठ में दबाना | मांसपेशियां दब जाती हैं — रीडिंग आमतौर पर कम आती है |
| मोटा या असमान फोन कवर | उपकरण टेढ़ा हो जाता है — हर रीडिंग में एक जैसा फर्क |
| मुलायम या ढलान वाली सतह पर मापना | समतल का आधार ही नहीं रहता — नतीजा भरोसेमंद नहीं |
| हर बार अलग व्यक्ति का मापना | बदलाव को समझना नामुमकिन हो जाता है |
संख्या का मतलब क्या है
जांच में प्रचलित मानक: 5° से कम आमतौर पर कम माना जाता है, 5°–6° ध्यान देने योग्य है (और अधिक वजन वाले बच्चों के लिए यही दिखाने का सामान्य मानक है, क्योंकि उनमें मुड़ाव आसानी से नहीं दिखता), और 7° या उससे अधिक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉक्टर को दिखाने का आमतौर पर स्वीकृत मानक है। दो मापों के बीच 2° या उससे अधिक की बढ़त पर भी दिखाना चाहिए, भले ही संख्या छोटी लगे। और जानें — स्कोलियोमीटर की सामान्य रीडिंग क्या है।
डॉक्टर को कब दिखाएं
अगर रीडिंग तय मानक तक पहुंच गई हो, अगर रीडिंग हर माप के साथ बढ़ रही हो, या अगर आपको कंधों का अलग-अलग स्तर, एक कंधे की हड्डी का उभार, कमर का असंतुलन या आगे झुकने पर पसलियों का उभार दिखे, तो समय लें। यह जांच इसलिए है कि आप यह फैसला पहले ले सकें, आपकी जगह फैसला लेने के लिए नहीं। हर व्यक्ति में नतीजे अलग होते हैं; संदेह हो तो विशेषज्ञ को दिखाएं।
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iPhone और Android पर उपलब्ध।

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चिकित्सकीय समीक्षा: डॉ. केविन लाउ, D.C., M.H.N. — कायरोप्रैक्टिक चिकित्सक और ScolioLife के संस्थापक; 25 वर्षों से अधिक समय से बिना सर्जरी वाली स्कोलियोसिस जांच और देखभाल पर केंद्रित, तथा Scoliometer App के डेवलपर।
डेवलपर के बारे में → अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- क्या मैं खुद पर स्कोलियोमीटर इस्तेमाल कर सकता हूं?
- भरोसेमंद तरीके से नहीं। इस जांच में आगे झुकना पड़ता है जबकि कोई दूसरा व्यक्ति उपकरण आपकी पीठ पर रखकर रीडिंग पढ़ता है। किसी और से मापने को कहें।
- व्यक्ति को कितना आगे झुकना चाहिए?
- जब तक पीठ लगभग समतल न हो जाए, हाथ ढीले लटके हुए। पूरी तरह पैर की उंगलियां छूने से रीढ़ गोल हो जाती है और वह घुमाव छिप सकता है जिसे जांच खोज रही है।
- पीठ पर कहां मापना चाहिए?
- ऊपरी पीठ, बीच की पीठ और कमर — तीनों हिस्सों से गुज़रें और सबसे बड़ी रीडिंग लिखें, साथ में यह भी कि वह किस हिस्से से आई।
- माप कितनी बार दोहराना चाहिए?
- तेज़ बढ़त के दौर से गुज़र रहे बच्चों में आमतौर पर हर दो से चार हफ्ते में; वयस्कों में महीने में एक बार पर्याप्त है। अंतराल का एक जैसा होना उसकी बारंबारता से ज़्यादा मायने रखता है।
- क्या फोन का कवर रीडिंग पर असर डालता है?
- डाल सकता है। मोटा या असमान कवर फोन को टेढ़ा कर देता है और हर बार एक जैसा फर्क जोड़ देता है। हो सके तो बिना कवर के मापें और हर बार हालात एक जैसे रखें।
संबंधित मार्गदर्शिकाएं
संदर्भ: van West HM, Herfkens J, Rutges JPHJ, आदि. The smartphone as a tool to screen for scoliosis, applicable by everyone. European Spine Journal 2022;31:990–995. इस शोध ने स्मार्टफोन आधारित ATR जांच को एक विधि के रूप में परखा, किसी एक ऐप को नहीं।